मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

बाघ बचाओ प्रतियोगिता चिट्ठाजगत

एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं।
क्या से क्या हो गया, और क्यों, आपका क्या सोचना है?

भाग लीजिए चिट्ठाजगत.इन द्वारा प्रायोजित एक और लेखन प्रतियोगिता, इसमें आप अपने निबंध, कविताएँ, व्यंग्य, कार्टून, तस्वीरें और वीडियो अपने चिट्ठे पर चढ़ा कर, शीर्षक में १४११ (या 1411) लिख दें।

प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 28-फरवरी-2010 है, प्रतियोगिता क्या लिखने का एक और बहाना है, वही तो हम सब खोजते हैं न?

इनाम इस प्रकार हैं -

१. 1001/-
२. 501/-
३. 251/-


समझ नहीं आ रहा कि शुरू कैसे करें? तो कुछ जानकारी यहाँ से पाएँ -

http://saveourtigers.com/blog/
http://projecttiger.nic.in/
http://www.youtube.com/saveourtigers
http://www.facebook.com/pages/Stripey-the-Cub/316470889745?ref=ts
http://twitter.com/saveourtigers
http://www.wwfindia.org/

और लिखिए! ध्यान रहे, शीर्षक में १४११ (या 1411) लिखा होना चाहिए!

या भाग लेने के लिए अपनी नई पोस्ट के लिंक को यहाँ पर एक टिप्पणी कर बता दें।

यदि कोई सवाल हो तो लिखें, पता है - saveourtigers@chitthajagat.in

रविवार, 31 मई 2009

अपने चिट्ठों को ट्विटर से जोड़ें Chitthajagat Twitter Application

पेश है ट्विटर @चिट्ठाजगत तंत्र (Chitthajagat Twitter Application),

http://twitter.chitthajagat.in

ट्विटर @चिट्ठाजगत तंत्र हिन्दी चिट्ठों को ट्विटर से जोड़ता है। आप इस पर पंजीकृत हो अपने चिट्ठे के नए लेख स्वतः ट्विटर पर अपने खाते से सूचित कर सकते हैं। दूसरों के नए लेख ट्विटर पर अपने खाते में निजी संदेश के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।

चिट्ठे जोड़ना आसान है,
आपका ट्विटर (http://twitter.com) पर खाता होना चाहिए

http://twitter.chitthajagat.in पर जाएँ

आपको यह बटन दिखेगा
>अपने ट्वि्टर खाते को चिट्टाजगत से जुड़नें की अनुमती दें
यह बटन दबाएँ

आपको ट्विटर पर ले जाया जाएगा

Allow बटन दबाते ही आपका ट्विटर खाता चिट्ठाजगत से जुड़ जाएगा। इस प्रक्रिया में आपका पासवर्ड चिट्ठाजगत को पता नहीं चलेगा। Allow करने से आप चिट्ठाजगत तंत्र को अपने खाते में पोस्ट लिखने की अनुमती देंगे।

आपको वापस http://twitter.chitthajagat.in/ भेज दिया जाएगा, वहाँ आप एक एक कर आप अनेक चिट्ठे सहेज सकते हैं, बस चिट्ठाजगत पर चिट्ठा पंजीकृत होना चाहिए।

आपका लेख जैसे ही चिट्ठाजगत पर छपेगा ४-५ मिनट में उस की सुचना "आपके ट्विटर खाते" पर हो जाएगी। सो हर बार लेख लिखते ही पोस्ट की सूचना ट्विटर पर देने नहीं जाना पड़ेगा।

इसी प्रकार दूसरों के चिट्ठों के लेख निजी संदेश के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। वैसे आप दूसरों के लेख भी अपने खाते से सूचित कर सकते हैं, इस से इस चिट्ठे का मालिक खुश ही होगा :)

इस तंत्र में और सुविधाएँ भी कुछ दिन में।

चिट्ठाजगत सेवा दल
http://twitter.chitthajagat.in

सोमवार, 26 जनवरी 2009

वर्ष २००८ में चिट्ठाकारिता : चिट्ठाजगत.इन के चश्मे से

वर्ष २००८ शुरू में चिट्ठाजगत के पास १५०० के करीब चिट्ठे थे, जो अंत में बढ़ कर ६००० हो गए। चिट्ठे हर महीने तो एक रफ़्तार से जुड़ते ही हैं, मगर छुट्टी (गर्मी, दशहरा, सर्दी) के दिनों में इन की संख्या अधिक होती है।

हर महीने छपने वाली पोस्ट संख्या पर नज़र डालें तो ५,५०० लेख देखने वाला यह संसार अंत तक १६,००० लेख देखने लगा। आँकड़े देखने पर यह भी दिखा कि किसी भी महीने में देखें, एक तिहाई चिट्ठे ही सक्रिय रहते हैं।
जनवरी में ५०० और दिसंबर में २,१००।

हर वर्ग को अलग अलग देखें तो समाज, समाचार, इलाकाई, मस्ती और कला मुख्य विषय हैं। २००८ में जुड़े नए चिट्ठों  का अलग अलग वर्ग में हिस्सा इस प्रकार था।
६,००० चिट्ठों में से अगर कोई एक मुख्य तरह का वर्ग कोई पूछे तो वह है कविताई चिट्ठों का, २०% चिट्ठे यानी १,२००-१,३०० चिट्ठे केवल कविताई चिट्ठे हैं।

२००८ में दो प्रमुख मुद्दे, हाँ यह तो सिर्फ दो ही मिले,
१. बिंद्रा का पदक
२. दूसरा आतंक, मालेगांव से मुंबई तक

आतंक के मुद्दे ने तो शायद हर वर्ग के चिट्ठाकार को आकर्षित किया, इस से रोज़ के लेखों की संख्या में भी काफ़ी वृद्धि हुई।


यह था साल २००८ चिट्ठाजगत.इन के चश्मे से।


गुरुवार, 17 जुलाई 2008

विंडोज़ लाईव राईटर से चिट्ठाजगत सर्वर पिंग करना

आप अपने नए पोस्ट विंडोज़ लाईव राईटर से छापते हैं, तो आपके लिए चिट्ठाजगत को नए लेख की सूजना देने का एक आसान विकल्प है।

विंडोज़ लाईव राईटर पर टूल्स - ऑपशन्स पर जाएँ

 

wlw1

पिंग सर्वर पर चटका लगाएँ

सैंड पिंग्स को चालू करें

http://auzaar.chitthajagat.in से अपने चिट्ठे का पिंग कोड उठाएँ और जैसे के तैसे वहाँ चिपका दें।

wlw2

अब आप जैसे ही विंडोज़ लाईव राईटर से लेख लिखेंगे चिट्ठाजगत पर छप जाएगा।

शुक्रवार, 30 मई 2008

चिट्ठाकार किस समय छापते हैं अपने लेख

chart

इस ग्राफ पर नज़र डालें यह बताता है हर घण्टे की खबर। कितने लेख छपे, किस घण्टे में। शाम सात बजे से अगले दिन पाँच बजे कू खबर देता है ग्राफ।

चिट्ठाकार मूलतह दो वर्गों में बाटे जा सकते हैं, दफतर से लिखने वाले, घर से लिखने वाले।

ग्राफ दो बार उछाल देता है एक रात ७ बजे से ११ बजे, एक दोपहर एक बजे से ४ बजे तक।

दोपहर का उछाल ज्यादा ऊँचा है, मतलब अधिक लोग दफतर से लिखते हैं, भोजन कर दफतर का काम निपटा एक पोस्ट डाल दी।

शाम को छापने वाले घर से छापते है, फुरसत से रात का खाना खा पोस्ट लिखते हैं, ९-११ के बीच प्रकाशित करते हैं।

सोमवार, 28 अप्रैल 2008

चिट्ठाजगत का पुस्तचिह्न बनाएँ, धड़ाधड़ चिट्ठाजगत खोल के चिट्ठे पढ़ें

हर बार ब्राउज़र में ऊपर बने बक्से में chitthajagat.in लिख कर चिट्ठाजगत तक पहुँचा तो जा सकता है, पर अगर उससे आसान तरीका हो तो क्यों न अपनाया जाए। पन्द्रह अक्षर लिखने के बजाय अगर एक चटके से काम चला सकते हैं तो क्यों न किया जाए? आइए देखते हैं कि यह कैसे किया जा सकता है।

नीचे चार ब्राउज़रों में चिट्ठाजगत का पुस्तकचिह्न बनाने की विधि दी गई है, अपनी पसन्द के ब्राउज़र की विधि अपनाएँ, ताकि बस एक चटके से अपने पसन्दीदा ताज़े चिट्ठों तक पहुँच सकें।

 

 

 

ie.PNG इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर

पहले देखते हैं इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में यह कैसे करेंगे। हर विण्डोज़ मशीन में इण्टर्नेट ऐक्स्प्लोरर पहले से ही होता है।

 

सबसे पहले चिट्ठाजगत का स्थल इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में खोलें।

 

उसके बाद, पसंद में जा के पसंद में जोड़ें... चुनें।

 

chija-pustakchinh-ie-1.PNG

अगर आपके पास अंग्रेज़ी वाला इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर है, तो यह फ़ेवरिट्स -> ऐड टु फ़ेवरिट्स... होगा।

 

इसके बाद, अगली खिड़की में "लिंक्स" के अन्दर इसे जोड़ दें।

chija-pustakchinh-ie-2.PNG

 

यहाँ ओके दबाते ही आपको इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर के "लिंक्स" के तहत "चिट्ठाजगत" दिख जाएगा।

यदि आपको यह नहीं दिख रहा हो, तो आप लिंक्स प्रदर्शित करने के लिए दृश्य -> उपकरण पट्टियाँ -> लिंक्स पर सही का निशान लगा दें। दिखने लगेगा। अंग्रेज़ी वाले ब्राउज़र में यह व्यू -> टूलबार्स -> लिंक्स में मिलेगा।

chija-pustakchinh-ie-3.PNG

 

बस, अब आपको इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में सामने सामने चिट्ठाजगत की कुञ्जी दिखेगी, जिसे आप जब चाहें चटका के चिट्ठाजगत तक पहुँच सकते हैं। पन्द्रह अक्षर लिखने की बचत।

chija-pustakchinh-ie.PNG

 

 

 

firefox.PNG फ़ायर्फ़ाक्स

फ़ायर्फ़ाक्स एक अच्छा, तेज़ ब्राउज़र है जो विण्डोज़ और लिनक्स दोनों पर उपलब्ध है। यदि आप फ़ायर्फ़ाक्स उतारना चाहें तो http://firefox.com से यह निःशुल्क उपलब्ध है।

अगर आप फ़ायर्फ़ाक्स का इस्तेमाल करते हैं, तो चिट्ठाजगत का पृष्ठ खोलने के बाद कंट्रोल-डी दबाएँ, और "बुकमार्क्स टूलबार" नामक फ़ोल्डर में सँजोएँ।

 chija-pustakchinh-firefox-1.PNG

 

चिट्ठाजगत की कुञ्जी आपको फ़ायर्फ़ाक्स में भी दिखने लगेगी।

chija-pustakchinh-firefox-2.PNG

safari.PNG सफ़ारी

सफ़ारी नामक ब्राउज़र भी निःशुल्क उपलब्ध है। यह विण्डोज़ और सेब दोनों के लिए उतारा जा सकता है। इसे आजमाने और उतारने के लिए आप http://apple.com/safari पर जा सकते हैं। यदि आप सफ़ारी का इस्तेमाल करते हैं, तो पुस्तकचिह्न बनाने के लिए,

 

चिट्ठाजगत का स्थल सफ़ारी में खोलें,

 

उसके बाद, बुकमार्क्स -> ऍड बुकमार्क पर जाएँ,

chija-pustakchinh-safari.PNG

 

और बुकमार्क्स बार में इसे सँजो लें।

chija-pustakchinh-safari-2.PNG

 

ऐसा करते ही, सफ़ारी में भी आपको चिट्ठाजगत की कुञ्जी सामने दिखने लगेगी।

chija-pustakchinh-safari-3.PNG

 

अब आप इस पर चटका लगा के सीधे चिट्ठाजगत पर पहुँच सकते हैं, हर बार chitthajagat.in लिखने की ज़रूरत नहीं।

 

 

opera.PNG ऑपेरा

ऑपेरा नामक ब्राउज़र भी निःशुल्क उपलब्ध है। इसे आजमाने और उतारने के लिए आप http://in.opera.com/download पर जा सकते हैं – जी हाँ, इसका स्थल भी हिन्दी में है, और यह विण्डोज़, लिनक्स तथा सेब – तीनों के लिए उपलब्ध है। यदि आप ऑपेरा का इस्तेमाल करते हैं, तो

 

चिट्ठाजगत का स्थल ऑपेरा में खोलने के बाद,

 

बुकमार्क्स -> बुकमार्क पेज... पर जाएँ।

 

chija-pustakchinh-opera-1.PNG

 

 

फिर, इसे जोड़ दें।

chija-pustakchinh-opera-2.PNG

 

जोड़ते ही, चिट्ठाजगत की कुञ्जी आपके ब्राउज़र में सामने ही आ जाएगी।

 

chija-pustakchinh-opera-3.PNG

 

बस अब बार बार chitthajagat.in लिखने की ज़रूरत नहीं। पुस्तकचिह्न में से चिट्ठाजगत को चुन लें और धड़ाधड़ छपती प्रविष्टियों का आनन्द लें।

 

आशा है इस लेख के जरिए आपको चिट्ठाजगत तक और तेज़ी से पहुँचने में आसानी होगी। यदि ऊपर दिए कदमों में कोई समस्या आए तो कृपया इस लेख पर टिप्पणी करें।

 

इसके अलावा, यदि चिट्ठाजगत से सम्बन्धित कोई और सुझाव हो तो भी टिप्पणी करें।