पेश है ट्विटर @चिट्ठाजगत तंत्र (Chitthajagat Twitter Application),
http://twitter.chitthajagat.in
ट्विटर @चिट्ठाजगत तंत्र हिन्दी चिट्ठों को ट्विटर से जोड़ता है। आप इस पर पंजीकृत हो अपने चिट्ठे के नए लेख स्वतः ट्विटर पर अपने खाते से सूचित कर सकते हैं। दूसरों के नए लेख ट्विटर पर अपने खाते में निजी संदेश के रूप में प्राप्त कर सकते हैं।
चिट्ठे जोड़ना आसान है,
आपका ट्विटर (http://twitter.com) पर खाता होना चाहिए
http://twitter.chitthajagat.in पर जाएँ
आपको यह बटन दिखेगा
>अपने ट्वि्टर खाते को चिट्टाजगत से जुड़नें की अनुमती दें
यह बटन दबाएँ
आपको ट्विटर पर ले जाया जाएगा
Allow बटन दबाते ही आपका ट्विटर खाता चिट्ठाजगत से जुड़ जाएगा। इस प्रक्रिया में आपका पासवर्ड चिट्ठाजगत को पता नहीं चलेगा। Allow करने से आप चिट्ठाजगत तंत्र को अपने खाते में पोस्ट लिखने की अनुमती देंगे।
आपको वापस http://twitter.chitthajagat.in/ भेज दिया जाएगा, वहाँ आप एक एक कर आप अनेक चिट्ठे सहेज सकते हैं, बस चिट्ठाजगत पर चिट्ठा पंजीकृत होना चाहिए।
आपका लेख जैसे ही चिट्ठाजगत पर छपेगा ४-५ मिनट में उस की सुचना "आपके ट्विटर खाते" पर हो जाएगी। सो हर बार लेख लिखते ही पोस्ट की सूचना ट्विटर पर देने नहीं जाना पड़ेगा।
इसी प्रकार दूसरों के चिट्ठों के लेख निजी संदेश के रूप में प्राप्त कर सकते हैं। वैसे आप दूसरों के लेख भी अपने खाते से सूचित कर सकते हैं, इस से इस चिट्ठे का मालिक खुश ही होगा :)
इस तंत्र में और सुविधाएँ भी कुछ दिन में।
चिट्ठाजगत सेवा दल
http://twitter.chitthajagat.in
रविवार, ३१ मई २००९
अपने चिट्ठों को ट्विटर से जोड़ें Chitthajagat Twitter Application
प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ११:२१ PM 0 राय - पढ़ें व लिखें
सोमवार, २६ जनवरी २००९
वर्ष २००८ में चिट्ठाकारिता : चिट्ठाजगत.इन के चश्मे से
वर्ष २००८ शुरू में चिट्ठाजगत के पास १५०० के करीब चिट्ठे थे, जो अंत में बढ़ कर ६००० हो गए। चिट्ठे हर महीने तो एक रफ़्तार से जुड़ते ही हैं, मगर छुट्टी (गर्मी, दशहरा, सर्दी) के दिनों में इन की संख्या अधिक होती है।
हर महीने छपने वाली पोस्ट संख्या पर नज़र डालें तो ५,५०० लेख देखने वाला यह संसार अंत तक १६,००० लेख देखने लगा। आँकड़े देखने पर यह भी दिखा कि किसी भी महीने में देखें, एक तिहाई चिट्ठे ही सक्रिय रहते हैं।
जनवरी में ५०० और दिसंबर में २,१००।
हर वर्ग को अलग अलग देखें तो समाज, समाचार, इलाकाई, मस्ती और कला मुख्य विषय हैं। २००८ में जुड़े नए चिट्ठों का अलग अलग वर्ग में हिस्सा इस प्रकार था।६,००० चिट्ठों में से अगर कोई एक मुख्य तरह का वर्ग कोई पूछे तो वह है कविताई चिट्ठों का, २०% चिट्ठे यानी १,२००-१,३०० चिट्ठे केवल कविताई चिट्ठे हैं।
२००८ में दो प्रमुख मुद्दे, हाँ यह तो सिर्फ दो ही मिले,
१. बिंद्रा का पदक
२. दूसरा आतंक, मालेगांव से मुंबई तक
आतंक के मुद्दे ने तो शायद हर वर्ग के चिट्ठाकार को आकर्षित किया, इस से रोज़ के लेखों की संख्या में भी काफ़ी वृद्धि हुई।
प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ५:०९ PM 0 राय - पढ़ें व लिखें
चिप्पी: चिट्ठाकारिता, चिट्ठाजगत.इन, २००८
गुरुवार, १७ जुलाई २००८
विंडोज़ लाईव राईटर से चिट्ठाजगत सर्वर पिंग करना
आप अपने नए पोस्ट विंडोज़ लाईव राईटर से छापते हैं, तो आपके लिए चिट्ठाजगत को नए लेख की सूजना देने का एक आसान विकल्प है।
विंडोज़ लाईव राईटर पर टूल्स - ऑपशन्स पर जाएँ
पिंग सर्वर पर चटका लगाएँ
सैंड पिंग्स को चालू करें
http://auzaar.chitthajagat.in से अपने चिट्ठे का पिंग कोड उठाएँ और जैसे के तैसे वहाँ चिपका दें। अब आप जैसे ही विंडोज़ लाईव राईटर से लेख लिखेंगे चिट्ठाजगत पर छप जाएगा।प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ६:४७ PM 0 राय - पढ़ें व लिखें
चिप्पी: विंडोज़ लाईव राईटर
शुक्रवार, ३० मई २००८
चिट्ठाकार किस समय छापते हैं अपने लेख
इस ग्राफ पर नज़र डालें यह बताता है हर घण्टे की खबर। कितने लेख छपे, किस घण्टे में। शाम सात बजे से अगले दिन पाँच बजे कू खबर देता है ग्राफ।
चिट्ठाकार मूलतह दो वर्गों में बाटे जा सकते हैं, दफतर से लिखने वाले, घर से लिखने वाले।
ग्राफ दो बार उछाल देता है एक रात ७ बजे से ११ बजे, एक दोपहर एक बजे से ४ बजे तक।
दोपहर का उछाल ज्यादा ऊँचा है, मतलब अधिक लोग दफतर से लिखते हैं, भोजन कर दफतर का काम निपटा एक पोस्ट डाल दी।
शाम को छापने वाले घर से छापते है, फुरसत से रात का खाना खा पोस्ट लिखते हैं, ९-११ के बीच प्रकाशित करते हैं।
प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ८:५२ PM 1 राय - पढ़ें व लिखें
सोमवार, २८ अप्रैल २००८
चिट्ठाजगत का पुस्तचिह्न बनाएँ, धड़ाधड़ चिट्ठाजगत खोल के चिट्ठे पढ़ें
हर बार ब्राउज़र में ऊपर बने बक्से में chitthajagat.in लिख कर चिट्ठाजगत तक पहुँचा तो जा सकता है, पर अगर उससे आसान तरीका हो तो क्यों न अपनाया जाए। पन्द्रह अक्षर लिखने के बजाय अगर एक चटके से काम चला सकते हैं तो क्यों न किया जाए? आइए देखते हैं कि यह कैसे किया जा सकता है।
नीचे चार ब्राउज़रों में चिट्ठाजगत का पुस्तकचिह्न बनाने की विधि दी गई है, अपनी पसन्द के ब्राउज़र की विधि अपनाएँ, ताकि बस एक चटके से अपने पसन्दीदा ताज़े चिट्ठों तक पहुँच सकें।
इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर
पहले देखते हैं इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में यह कैसे करेंगे। हर विण्डोज़ मशीन में इण्टर्नेट ऐक्स्प्लोरर पहले से ही होता है।
सबसे पहले चिट्ठाजगत का स्थल इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में खोलें।
उसके बाद, पसंद में जा के पसंद में जोड़ें... चुनें।

अगर आपके पास अंग्रेज़ी वाला इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर है, तो यह फ़ेवरिट्स -> ऐड टु फ़ेवरिट्स... होगा।
इसके बाद, अगली खिड़की में "लिंक्स" के अन्दर इसे जोड़ दें।

यहाँ ओके दबाते ही आपको इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर के "लिंक्स" के तहत "चिट्ठाजगत" दिख जाएगा।
यदि आपको यह नहीं दिख रहा हो, तो आप लिंक्स प्रदर्शित करने के लिए दृश्य -> उपकरण पट्टियाँ -> लिंक्स पर सही का निशान लगा दें। दिखने लगेगा। अंग्रेज़ी वाले ब्राउज़र में यह व्यू -> टूलबार्स -> लिंक्स में मिलेगा।

बस, अब आपको इण्टर्नेट ऍक्स्प्लोरर में सामने सामने चिट्ठाजगत की कुञ्जी दिखेगी, जिसे आप जब चाहें चटका के चिट्ठाजगत तक पहुँच सकते हैं। पन्द्रह अक्षर लिखने की बचत।

फ़ायर्फ़ाक्स
फ़ायर्फ़ाक्स एक अच्छा, तेज़ ब्राउज़र है जो विण्डोज़ और लिनक्स दोनों पर उपलब्ध है। यदि आप फ़ायर्फ़ाक्स उतारना चाहें तो http://firefox.com से यह निःशुल्क उपलब्ध है।
अगर आप फ़ायर्फ़ाक्स का इस्तेमाल करते हैं, तो चिट्ठाजगत का पृष्ठ खोलने के बाद कंट्रोल-डी दबाएँ, और "बुकमार्क्स टूलबार" नामक फ़ोल्डर में सँजोएँ।

चिट्ठाजगत की कुञ्जी आपको फ़ायर्फ़ाक्स में भी दिखने लगेगी।

सफ़ारी
सफ़ारी नामक ब्राउज़र भी निःशुल्क उपलब्ध है। यह विण्डोज़ और सेब दोनों के लिए उतारा जा सकता है। इसे आजमाने और उतारने के लिए आप http://apple.com/safari पर जा सकते हैं। यदि आप सफ़ारी का इस्तेमाल करते हैं, तो पुस्तकचिह्न बनाने के लिए,
चिट्ठाजगत का स्थल सफ़ारी में खोलें,
उसके बाद, बुकमार्क्स -> ऍड बुकमार्क पर जाएँ,

और बुकमार्क्स बार में इसे सँजो लें।

ऐसा करते ही, सफ़ारी में भी आपको चिट्ठाजगत की कुञ्जी सामने दिखने लगेगी।

अब आप इस पर चटका लगा के सीधे चिट्ठाजगत पर पहुँच सकते हैं, हर बार chitthajagat.in लिखने की ज़रूरत नहीं।
ऑपेरा
ऑपेरा नामक ब्राउज़र भी निःशुल्क उपलब्ध है। इसे आजमाने और उतारने के लिए आप http://in.opera.com/download पर जा सकते हैं – जी हाँ, इसका स्थल भी हिन्दी में है, और यह विण्डोज़, लिनक्स तथा सेब – तीनों के लिए उपलब्ध है। यदि आप ऑपेरा का इस्तेमाल करते हैं, तो
चिट्ठाजगत का स्थल ऑपेरा में खोलने के बाद,
बुकमार्क्स -> बुकमार्क पेज... पर जाएँ।

फिर, इसे जोड़ दें।

जोड़ते ही, चिट्ठाजगत की कुञ्जी आपके ब्राउज़र में सामने ही आ जाएगी।

बस अब बार बार chitthajagat.in लिखने की ज़रूरत नहीं। पुस्तकचिह्न में से चिट्ठाजगत को चुन लें और धड़ाधड़ छपती प्रविष्टियों का आनन्द लें।
आशा है इस लेख के जरिए आपको चिट्ठाजगत तक और तेज़ी से पहुँचने में आसानी होगी। यदि ऊपर दिए कदमों में कोई समस्या आए तो कृपया इस लेख पर टिप्पणी करें।
इसके अलावा, यदि चिट्ठाजगत से सम्बन्धित कोई और सुझाव हो तो भी टिप्पणी करें।
प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ४:३७ PM 0 राय - पढ़ें व लिखें
शुक्रवार, २२ फरवरी २००८
चिट्ठाजगत-संकलक के आँकड़े - कौन सी सेवा पसन्द करते हैं हिन्दी के चिट्ठाकार?
यूँ ही खाली बैठे थे - चिट्ठाजगत-संकलक कुछ दिन पहले बैंकॉक घूम के आया था, तब तक चिन्ता थी, अब आराम फ़रमाते हुए सोचा कि देखते हैं कुछ आँकड़े।
आइए, देखते हैं कि हिन्दी चिट्ठों की दुनिया में किस किस स्लेट पर कितने लोग लिखते हैं।
आप पाएँगे कि अधिकतम चिट्ठे ब्लॉग्स्पॉट पर ही आतिथ्यित हैं। वैसे यह बात तो हममें से अधिकतर को पता ही थी, लेकिन आँकड़े सामने रखना अच्छा रहता है। दिलचस्प बात यह है कि सौ से कुछ अधिक लोग ही अपने डोमेन पर चिट्ठेबाज़ी करते हैं।
एक और दिलचस्प बात यह है कि निजी डोमेन, ब्लॉग्स्पॉट, वर्ड्प्रेस वाले हिन्दी के चिट्ठे हटा दें, तो कुल जमा सौ चिट्ठे नहीं बचेंगे।
है न दिलचस्प?
क्या भारत आधारित नई सेवाओं के आने से हिन्दी के चिट्ठा लेखन में कोई फ़र्क आया है?
देखते हैं उन सेवाओं को जो पिछले साल के बाद ही शुरू हुई हैं - पिछले साल, २००७ की जून के बाद से १२०० नए चिट्ठे आए हैं, और भारत आधारित नई सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले चिट्ठे केवल साठ के आसपास ही हैं। यानी नए चिट्ठों में से कुल पाँच फ़ीसदी ने भारत आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।
कारण क्या हैं, यह आप ही सोचें और बताएँ। आखिर चुनाव भी आप ही ने किया है न।
यह आँकड़े प्रायः सभी हिन्दी के चिट्ठों का प्रतिनिधित्व करते हैं, शायद ९९% का। क्योंकि चिट्ठाजगत-संकलक सब को शामिल करता है।
लाते रहेंगे इसी तरह के दिलचस्प आँकड़े आपके पास। अपनी राय देना न भूलिएगा।
प्रेषक - चिट्ठाजगत सेवा दल समय - ११:२५ PM 3 राय - पढ़ें व लिखें
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