एक ज़माना था जब लोग बाघ से बचते थे, और आज का ज़माना है जब लोग बाघ को बचाते हैं।
क्या से क्या हो गया, और क्यों, आपका क्या सोचना है?
भाग लीजिए चिट्ठाजगत.इन द्वारा प्रायोजित एक और लेखन प्रतियोगिता, इसमें आप अपने निबंध, कविताएँ, व्यंग्य, कार्टून, तस्वीरें और वीडियो अपने चिट्ठे पर चढ़ा कर, शीर्षक में १४११ (या 1411) लिख दें।
प्रतियोगिता की अंतिम तिथि 28-फरवरी-2010 है, प्रतियोगिता क्या लिखने का एक और बहाना है, वही तो हम सब खोजते हैं न?
इनाम इस प्रकार हैं -
१. 1001/-
२. 501/-
३. 251/-
समझ नहीं आ रहा कि शुरू कैसे करें? तो कुछ जानकारी यहाँ से पाएँ -
http://saveourtigers.com/blog/
http://projecttiger.nic.in/
http://www.youtube.com/
http://www.facebook.com/pages/
http://twitter.com/
http://www.wwfindia.org/
और लिखिए! ध्यान रहे, शीर्षक में १४११ (या 1411) लिखा होना चाहिए!
या भाग लेने के लिए अपनी नई पोस्ट के लिंक को यहाँ पर एक टिप्पणी कर बता दें।
यदि कोई सवाल हो तो लिखें, पता है - saveourtigers@chitthajagat.in
42 राय - पढ़ें व लिखें:
बस 1411 बाघ बचे हैं, अपने बच्चो को क्या बताओगे?
See : http://www.pawanmall.net/2010/02/1411.html
बहुत जल्द ही टाइगर यानी बाघ का शिकार गधे, बंदर, बकरी और चूहा मिलकर करेंगे। जी हां, बाघ से राष्ट्रीय पशु का खिताब छिनने जा रहा है और उसके सिंहासन पर कब्जे के लिए गधे , बंदर , बकरी और चूहे के बीच जंग की तैयारी है। राष्ट्रीय पशु बाघ की घटती हुई तादाद से लगता है कि यह जल्द ही विलुप्त हो जाएगा
बाघ बचाने के पुण्य कार्य में चिट्ठाजगत की प्रभावी भूमिका के लिये आभार।
आपका ये प्रयास बहुत सराहणीय है । कोशिश करूँगी कि जरूर इस पर कुछ लिख सकूँ। आपका धन्यवाद।
zaroor!!! insha allah main ek post jald hi is par taiyaar karunga !!!
बाघ जैसे खूंखार जानवर को बचाने का क्या फ़ायदा ?? ये क्यों पुण्य कार्य है??---कोई बतायेगा!
डोक्टर श्याम गुप्ता साहब को ससम्मान पहुचे :-
जिस विषय में भी आप डॉक्टर की उपाधि से नवाजे गएँ हैं... में चाहूँगा उस कागज़ के टुकड़े को आग लगा दें.
भोजन श्रंखला, वर्ना जंगली शाकाहारी जंगल खा जायेंगे. शहर में घुस आयेंगे. हमसे हमारा जीवन छीन लेंगे. और आप तो जानते होंगे इनमें सहज वृत्ति में बसी स्वजाती दुश्मनी के चलते इनकी तादाद बहोत ज्यादा नहीं हो पाती परिणामस्वरूप ये कभी इतने नहीं होंगे की शहरों से हमें विस्थापित कर दे. जबकि शाकाहारी जंतु ऐसा कर सकते हैं. सो इससे खतरा तब तक नहीं है जब तक हम जंगल में ना हों. लेकिन जब ये जंगल में नहीं होगा तो हम रेगिस्तान में खड़े नज़र आयेंगे. यही है "इकोसिस्टम". में इसपर लौटूंगा नहीं अतः यदि मुझपर गुस्सा ज़ाहिर करना है तो मुझे ईमेल कीजियेगा. क्योंकि यहाँ तर्क करेंगे तो में उसे पढ़ ही नहीं पाउँगा.
वैसे आपको में बता दूं की शेर बाघों से में भी बहोत डरता हूँ शायद आप से ज्यादा तो वैसे में भी आपकी ही तरफ हूँ, इन्हें मार दिया जाये तो कमसकम में जंगल में अन्दर तक घुस कर हरियाली का आनंद उठा पाउँगा.. रही बात मेरे ही कही बात की (शाकाहारी जंतुओं का धरती को रेगिस्तान बना देने की) तो उसके लिए हम चाहें तो खुद उनकी आबादी का नियंत्रण कर लें तो भी चल जायेगा. लेकिन तब समस्या आयेगी सूक्ष्म जीवों मेगेट्स और मृतभक्षियों की तो उन सबके लिए हम कुछ ना कुछ तो कर ही सकते हैं. हाँ अगर लोग शेर की धारियां उसकी शान से प्रभावित ही होना चाहें तो इनकी ज़रुरत महसूस होगी वर्ना ऐसी तो कोई कमी नहीं हो जाने वाली जिसे हम ना नियंत्रित कर पायें.
bagh bachao ye mudda vastav mein ati gambhir hai aur is par vichar karna avashyak hai...
kya is pratigita mein koi shabd seema bhi hai?
बाघ को बचाने की बात करते हैं हम..पर क्या लोगो सुधरेंगे..देवी के देश में देवियों को गर्भ में मार दिया जाता है और हर साल फ्रेम में सजा के माता की तस्वीर दो बार नवरात्री मनाया जाती है..गाय को माता कहकर पूजा करते है. और तस्करी के माध्यम से हजारों की तादाद में गाय को बांग्लादेश भेज देते हैं..यही हाल बाघ का होने वाला है....देवी की सवारी के रुप में चित्रों मे रह जाएगा बाघ अगर हम नहीं सुधरे और चेतें...हम मानव को क्या हक है कि आने वाली पीढ़ी इस शानदार प्राणी को जंगलों में न देख सके....कई बार ये साबित हो चुका है कि अभयारण्यों में बाघ का अवैध शिकार सरकारी अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत की वजह से नहीं हो रहा है....तो जरा जागें और सिस्टम को सुधारने की कोशिश तो करें...
अंतिम तिथी से पहले ब्लॉग लिखुंगा..इसलिए नही की प्रतियोगिता जीतनी है....इसलिए क्योंकी मैं हर प्रयास करुंगा बाघ के लिए, जो भी संभव होगा करुंगा.....एक स्टोरी फाइल कर चुका हूं....
सिर्फ 1411 हम शर्मिदा है
waqthai.blogspot.com
आपके द्वारा यह प्रतियोगिता आयोजित करने से हिन्दी ब्लॉग जगत के साथी भी इस राजसी प्राणी को बचाने में योगदान दे सकेंगे, मैं काफी समय से बाघों पर लिखता आया हूँ, कृपया पिछले दिनों छपे इस पोस्ट पर ध्यान दें - शीर्षक है टाइगर ईयर में खत्म होते बाघ। लिंक - http://sandeeps.mywebdunia.com/2010/01/14/1263462660000.html
http://mahendragwaliori.blogspot.com/2010/02/1411-normal-0-false-false-false-en-us-x.html
1411 बाघ बचे हैं
हम शर्मिदा है
1411- बाघों के नाम
http://naisoch.blogspot.com/2010/02/1411.html
माननीय,
चिट्ठो की मशाल की रोशनी दूर तक जाती है | सार्थक प्रयास के लिए आभार |
१४११ शीर्षक से प्रेषित पोस्ट का अवलोकन करे |
सादर,
विनय के जोशी
http://www.vinay-vishesh.blogspot.com/
--
सच राघव का रूप है सच गोपाला गांव
जांके हिरदे सच बसा तीरथ वांके पांव
www.vinay-vishesh.blogspot.com
www.aachaman.blogspot.com
आवश्य! मैंने भी भगवान का समस्त आभार मानते हुए पोस्ट यहाँ लिखी है:
http://www.tarakash.com/joglikhi/?p=1590
http://singhkharikhari.blogspot.com/
http://singhkharikhari.blogspot.com/
1411बाघों, को बच्चो के लिए ही सही बचा लो
अब जरा सोचो की हम अपनी आने वाली नस्ल के लिए क्या छोड़ेगे, पन्नो पर बाघों के चित्र, विकिपीडिया पर उसकी जानकारी , कहानियो में शेर की बहदुरी के किस्से , शेर मार जायेगा लेकिन घास नहीं खायेगा जैसी कहावते, ज्यादा से उदार हुआ और मांग बड़ी तो कमाई के लिए एक अध् फिल्म बनादेगे .या फिर रास्ट्रीय चिन्ह के रूप में चार मुह वाला शेर छोड़ेगे . लेकिन जब आने वाली नस्ल में से ही कोई सिरफिरा हमारा रास्ट्रीय पशु बाघ को देखने कि जिद कर बैठा तो सोच लो क्या दिखाओगे ..... क्या समझोगे....... क्या कहोगे......... की हम तो गुम थे कमाने में हमने कुछ नहीं कर सके ? या फिर बाघ को सहेज के रखेगे........
फ़ेसला आप के ही हाथ है बीच का कोई रास्ता नहीं है, जंगल के लिए नहीं , बाघ के लिए, अपने लिए न सही, देश के लिए न सही बच्चो के लिए ही सही बचा लो बाघों को.
http://aarambha.blogspot.com/2010/02/blog-post_17.html
कुदरत और प्रकृति ने हमारे देश को ही नहीं बल्कि पूरी पृथ्वी को जीवन से नवाजा हैं और हर तरफ जहाँ भी नजर जाती हैं वहां हमें इस जीवन की विभिन्न उदहारण देखने को मिल जायंगे. और कुदरत ने सब को अपने मुताबिक जीवन व्यापन करने का हक़ दिया हैं. लेकिन हम मनुष्यों ने तो सिर्फ ये एक सोच बना ली हैं की ये पृथ्वी सिर्फ हमारी हैं और सारा अधिपत्य इसपर हमारा ही हैं. क्या ये हम सही कर रहे हैं ???? लेकिन मैं आपको बतलाना चाहता हु की हम भी पहले कभी इन बेजुबानो की तरह ही थे..... और हमने अपने आप को इतना विकसित किया की हम बाकियों को भूल गए. लेकिन अपने विकास के लिये किसी के घर मे घुसना और उनको मारना क्या उचित है. वो बेजुबान जानवर है पर हम क्या इन्सान कहलाने लायक है ??????????
बाघ बचाने के पुण्य कार्य में चिट्ठाजगत की प्रभावी भूमिका के लिये आभार।
सिर्फ 1411 बाघ ही बचे हैं, कहीं बच्चो को ये न बताना पड़े की, बेटा हमारा राष्ट्रीय पशु "?????" हैं.
ये गैर प्रतियोगी कड़ी भी देखें
http://chitthacharcha.blogspot.com/2010/02/1411.html
हां ,द,नेश जी, यही सच है, आपके प्रथम पेरा का आलेख ही सही जबाव है( बाकी बकवास व बगैर सोचे समझे कथ्य हैं) ’ भोजन श्रन्खला" जो अभी तक तमाम इस सीरीज़ में पढे हुए आलेखों में कही नही दिखाई दिया, लगभग सभी लोगों ने बस भाव पूर्ण जबाव व लेख( भेड चाल ) दिये हैं. किसी सामाजिक मुहिम को बिना वैग्यानिक व सार्थक तर्क के साथ ईश्वरीय नियम , आस्था के साथ नहीं रखा जायगा उसकी परिणति तमाम एसे कार्यों, योजनाओं की भांति --फ़ुस्स , होकर रह जायगी, रस्म अदायगी व वाग्विलास। वैसे भी हमारे आप के करने से क्या होना है ( प्रक्रति व ईश्वर ने अवश्य ही कोई उपाय सोच रखा होगा )जब तक इसके लिये जिम्मेदार लोगों पर कडाई से कानून का पालन नहीं होगा । एक विचार यह भी देखिये---समझिये--
ab inconvinienti Says:
February 18th, 2010 at 1:49 pm
ab inconvinienti Says:
February 18th, 2010 at 1:49 pm
जंगल ही नहीं रहे. अब अब बाघ बचा भी लें तो उनके लिए तफरीह की जगह कहाँ से लाएंगे? एक बाघिन को कम से कम बीस वर्ग किलोमीटर का व्यक्तिगत इलाका होता है, वहीँ बाघ का इलाका साठ से सौ वर्ग किलोमीटर का होता है. अगर युद्ध स्तर के प्रयासों से कुछ सालों में दस हज़ार बाघ बढ़ जाएँ तो देश में कम से कम दस लाख वर्ग किलोमीटर मानव रहित घने जंगलों की ज़रूरत होगी.
पर भारत का कुल वन क्षेत्रफल (खुले, अर्धहरित, घने वनों को मिला कर) छः लाख अस्सी हज़ार वर्ग किलोमीटर ही है . उसमें भी घने और अर्ध हरित वन (बाघों का प्राकृतिक आवास) चार लाख वर्ग किलोमीटर से भी कम बचे हैं. पर यह जंगल भी कब तक बने रहेंगे कौन जाने!
अर्थात इतने बाघों की संख्या बढ़ भी जाये तो उनके लिए प्राकृतिक आवास कहाँ से आएगा? मानव तो जानवरों के लिए जगह खाली करने से रहा. पानी, प्राकृतिक परिवेश और शिकार के आभाव में बाघ बस्तियों पर हमला करेंगे तब बाघ मारो अभियान शुरू होगा.
सब बाघ और शेर बचने के बारे में तो सोच रहे हैं पर इस समस्या की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है.
http://vikasvardhan.wordpress.com/2010/02/19/
1411 - अगली बार शायद पिजरें में भी न दिखे!!
http://aadityaranjan.blogspot.com/2010/02/1411.html
कैसी बिडंबना है कि पहले लोग बाघों से डरा करते थे और जंगलों में जाने से बचते थे कि कहीं से कोई बाघ न आ जाए॥! और अब आलम यह है कि लोग बन्दूक इत्यादि हथियार लेकर जंगलों का रुख करते हैं..। वो भी बाघों का शिकार करने! वही डर जो पहले इंसानों में बाघों के प्रति हुआ करता था, अब बाघों के जेहन में बैठ गया है। उन्हें लगता है कि क्या जाने कहीं से कोई इंसान आ जाए और अपनी बन्दूक का निशाना बना ले।
See The Link :
"http://dhentenden.blogspot.com/2010/02/blog-post_20.html"
Regards
"RAM"
१४११ हंजू को नहीं पता कैसा दिखता है बाघ ?
http://retghadi.blogspot.com/2010/02/blog-post_21.html
नस्म्कार
१४११ शीर्षक के अंतर्गत बाघों पर लिखी मेरी पोस्ट की लिंक हैं http://aarohijivantarang.blogspot.com/2010/02/1411.html
साभार
Here is a small effort of Share and Smile towards the cause of save tiger.
http://thatlovedflower.blogspot.com/2010/02/save-tiger-only-1411-left.html
Thanks
बाघ बचाओ आन्दोलन की सफलता की कामना करते हुए, मैं अपनी कविता इस आन्दोलन को समर्पित करता हूँ.
मेरी कविता का लिंक अधोलिखित है :-
http://mojowrites.wordpress.com/2010/02/20/
जल जंगल और जमीन ... बाघ का महत्व निर्विवाद है .... मेरा व्यंग लेख "बच्चो आओ बाग बचाओ " इसी कड़ी में मेरी शब्द प्रार्थना है कि १४११ का आंकड़ा जल्दी ही ४१११ को पार करे
.. link hai
http://vivekkevyang.blogspot.com/2010/02/1411.html
जैसा की वादा किया था.....पोस्ट का लिंक दे रहा हूं...
http://boletobindas.blogspot.com/2010/02/1411-1000.html
पर सवाल वही है कि क्या और सार्थक किया जा सकता है...क्या काले हिरण की रक्षा में लगे राजस्थान के लोगो की तरह सारे देश के लोग बाघ की रक्षा के लिए आगे आएंगे....राजस्थान के लोगों ने पैसे के दम पर नहीं सामाजिक एकजुटता की ताकत की मिसाल दी है....क्या बाघ के लिए भी ऐसा होगा..............?????????????????????
1411 बाघ और हिंदी चिट्ठा चिन्तक
1411 एक टाइगर की फरियाद
http://merajawab.blogspot.com
आपकी पहल काबिलेतारीफ है।
1411-स्थानीय ग्रामीण ही बचा सकतें है बाघ | Gyan Darpan ज्ञान दर्पण
1411 बाघ बचाओ आन्दोलन
post ke liye link kare
http://sanjaybhaskar.blogspot.com
... बाघों की घटती हुई संख्या चिंता का विषय है!...चिठ्ठाजगत द्वारा इस प्रतियोगिता का आयोजन महत्वपूर्ण है!..आशा है बडी संख्या में लेखक अपने विचार यहां प्रस्तुत करेंगे!
http://arunakapoor.blogspot.com/2010/02/1411.html
nice
"मीन राशि-के स्वभाव और प्रभाव ,मिलते हैं- आपके विचार ?
मित्रप्रवर ,राम -राम ,नमस्कार ||
आकाश में यद्यपि व्याप्त -द्वादश राशि ,२७ नक्षत्र ,नवग्रह के आलावा असंख्य ताराएँ हैं -फिर भी मूल बातों का आकलन हम नवग्रह और द्वादश राशि के आधार पर ही समझते हैं ||
अस्तु -ज्योतिष एक गणना है-और फलित उसका पूरक हैं | यदि हमारी गणना सही है तो फलित भी सही ही होगा ,इसलिए ज्योतिष को जानने के लिए गणना परम आवश्यक होती है | आज आधुनिक - तकनिकी के आगे-कुछ गणना कम होती जा रही है -आइये आपकी मीन राशि है -चाहे जन्माक्षर से हो या प्रचलित नामाक्षर से हो -मीन राशि के स्वभाव और प्रभाव यथावत ही होंगें ?
-यह राशि -द्विस्वभाव ,स्त्रीजाति ,कफ प्रकृति ,,जल तत्व ,रत्रिबली ,विप्रवर्ण,उत्तर दिशा की स्वामिनी होती है |इसका रंग पिंग [पीला ]है |इसका प्राकृतिक स्वभाव उत्तम ,दयालु और दयाशील है |यह सम्पूर्ण जल राशि है | इससे पैरों का विचार किया जाता है |
पूर्वाभाद्रपद का एक चरण ,उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र इसमें निहित है |रेवती नक्षत्र जब मीन राशि में संपृक्त अर्थात जुडती है तो उसका फल यह होता है --
संपूर्णानगः शुचीदक्षः साधु शूरो विचक्षणह |
रेवती संभवो लोके धन धान्य लंक्रितः ||
अभीष्ट भाव यह है - कि व्यक्ति सभी अंगों से पूर्ण ,पवित्र ,चतुर ,साधु ,वीर ,पंडित ,लेखक ,कलाकार और लोक में धन धान्यों से सुसंपादित और सुशोभित होता है |इस राशि का प्रतीक मछली है |यह करुणाऔर अनुकम्पा की प्रतीक भी है | सतोगुणी है |इस राशि का जातक सौम्य और धर्मावलम्बी होता है|इसे अत्यधिक खर्चीला और उच्च पद का आकांक्षी कहा गया है |इस राशि से चलचित्र सम्बन्धी व्यवसाय ,जलयात्रा ,रसायन तथा दवाई विज्ञानं आदि विषय के विचार और जातक को इन क्षत्रों में सफलता भी मिलती है |इस राशि के जातक मेधाशील और जिज्ञासु होते हैं ||
भवदीय निवेदक "झा शास्त्री "मेरठ |
निःशुल्क ज्योतिष सेवा -रात्रि ८ से९ ऑनलाइन या संपर्क सूत्र से मित्रबनकर आप प्राप्त कर सकते हैं |
-09897701636 -9358885616
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